
देहरादून। उत्तराखंड में उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया गया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) की हालिया बोर्ड बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि अब नारंगी और हरी श्रेणी के उद्योगों का स्थलीय निरीक्षण और सत्यापन थर्ड पार्टी के माध्यम से कराया जाएगा। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर अंतिम एनओसी (NOC) प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ही जारी करेगा।
इस फैसले से उद्योग लगाने की प्रक्रिया सरल होगी और लंबित मामलों का निस्तारण तेजी से किया जा सकेगा।
नारंगी श्रेणी – दवा निर्माण इकाइयाँ, होटल-रेस्त्रां आदि
हरी श्रेणी – हल्की इंजीनियरिंग इकाइयाँ, इलेक्ट्रॉनिक सामान की असेंबली यूनिट आदि
इन श्रेणियों के उद्योगों के स्थापना व संचालन से पहले होने वाले स्थलीय निरीक्षण और सत्यापन का कार्य अधिकृत थर्ड पार्टी संस्थाओं द्वारा किया जाएगा।
इन संस्थानों का लिया जाएगा सहयोग
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड निरीक्षण प्रक्रिया के लिए देश के प्रतिष्ठित तकनीकी एवं शोध संस्थानों का सहयोग लेगा, जिनमें शामिल हैं:
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम देहरादून
गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय पंतनगर
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली
इन संस्थानों के विशेषज्ञ औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण कर अपनी तकनीकी रिपोर्ट देंगे। इसके आधार पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एनओसी जारी करेगा।
क्षेत्रीय कार्यालयों के अधिकार बढ़े
अब तक क्षेत्रीय कार्यालयों को केवल 5 करोड़ रुपये तक की हरित श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों को अनुमति देने का अधिकार था। 5 करोड़ से अधिक लागत वाली इकाइयों की अनुमति के लिए प्रक्रिया मुख्यालय से पूरी करनी होती थी।
लेकिन अब नए निर्णय के अनुसार, क्षेत्रीय कार्यालय 10 करोड़ रुपये तक की औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और संचालन की अनुमति दे सकेंगे। इससे उद्योगों को तेजी से मंजूरी मिल सकेगी और मुख्यालय पर कार्यभार भी कम होगा।
इन उद्योगों की अनुमति मुख्यालय से ही
हालांकि कुछ विशेष श्रेणी की इकाइयों के लिए अनुमति प्रक्रिया पूर्ववत मुख्यालय से ही संचालित होगी। इनमें शामिल हैं:
स्टोन क्रशर
स्क्रीनिंग प्लांट
इंडक्शन फर्नेस
रेलिंग से संबंधित इकाइयाँ
इनसे जुड़े मामलों की स्वीकृति सीधे पीसीबी मुख्यालय से दी जाएगी।
राज्य में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के केवल चार क्षेत्रीय कार्यालय हैं और कर्मचारियों की भी कमी बनी हुई है। ऐसे में निरीक्षण प्रक्रिया में थर्ड पार्टी की भागीदारी से न केवल कार्य में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि उद्योग स्थापना की प्रक्रिया भी तेज होगी।
इस संबंध में प्रमुख सचिव एवं पीसीबी अध्यक्ष आर.के. सुधांशु ने कहा कि कुछ श्रेणियों के उद्योगों के निरीक्षण के लिए थर्ड पार्टी व्यवस्था लागू करने से कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनेगी।
राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इस फैसले से उत्तराखंड में उद्योग स्थापना को नई गति मिलने की उम्मीद है। निरीक्षण प्रक्रिया में तकनीकी विशेषज्ञों की भागीदारी से पारदर्शिता बढ़ेगी, अनुमति प्रक्रिया सरल होगी और निवेशकों को प्रोत्साहन मिलेगा।
यह कदम राज्य में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


