
काशीपुर: मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के डॉक्टरों ने 69 वर्षीय मरीज की मिनिमली इनवेसिव कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (MICS-CABG) सर्जरी सफलतापूर्वक की। मरीज के दिल की मुख्य धमनी लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग (LAD) में 100 प्रतिशत ब्लॉकेज था। दूसरे अस्पताल में एंजियोप्लास्टी के जरिए ब्लॉकेज खोलने का प्रयास सफल नहीं होने पर उसे मैक्स अस्पताल रेफर किया गया।
मरीज को पिछले 10 दिनों से सीने में दर्द और बेचैनी की शिकायत थी, जो दोनों कंधों, जबड़े और गले तक फैल रही थी। उसे पहले से कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर और टाइप-2 डायबिटीज की समस्या भी थी। जांच में LAD आर्टरी के मध्य हिस्से में पूरी तरह ब्लॉकेज पाया गया। एंजियोप्लास्टी के दौरान गाइडवायर ब्लॉकेज के पार नहीं पहुंच पाने के कारण बाईपास सर्जरी का निर्णय लिया गया।
इस मामले पर मैक्स अस्पताल शालीमार बाग के कार्डियक साइंसेज, कार्डियक सर्जरी (CTVS) विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. दिनेश चंद्रा ने बताया कि मरीज की स्थिति को देखते हुए MICS-CABG तकनीक चुनी गई। इसमें पसलियों के बीच छोटा चीरा लगाकर सर्जरी की जाती है और छाती की बीच वाली हड्डी को काटने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे उपयुक्त मरीजों को जल्दी चलने-फिरने और रिकवरी में मदद मिल सकती है।
सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में सुधार हुआ और उसे आईसीयू से सामान्य वार्ड में शिफ्ट किया गया। उपचार के दौरान उसकी किडनी की कार्यक्षमता स्थिर रही। सांस से संबंधित संक्रमण का इलाज करने के बाद मरीज को स्थिर स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। यह मामला दर्शाता है कि जटिल कोरोनरी आर्टरी ब्लॉकेज के चुनिंदा मामलों में मिनिमली इनवेसिव बाईपास सर्जरी एक प्रभावी विकल्प हो सकती है।


