
कांवड़ यात्रा के दौरान मिलावटखोर अपने मसूबों में कामयाब नहीं हो पाएगे, क्योंकि FSDA उन पर पूरी नजर रख रहा है.
देहरादून: श्रावण मास की कांवड़ यात्रा और उत्तराखंड की चारधाम यात्रा इस समय अपने चरम पर हैं. करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच सबसे बड़ी चुनौती भोजन और पेय पदार्थों की शुद्धता को लेकर सामने आई है. हरिद्वार से लेकर कांवड़ पटरी मार्ग और रुड़की-भगवानपुर तक खाद्य सुरक्षा विभाग ने जिस तरह लगातार छापेमारी और मौके पर जांच शुरू की है, उसने यह संकेत भी दिया है कि आस्था के इस विशाल आयोजन में मिलावटखोर भी सक्रिय हैं.
यही वजह है कि प्रशासन ने केवल कागजी जांच तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब को सीधे कांवड़ मार्ग पर उतार दिया. दूध, पनीर, घी, मसाले, खाद्य तेल, मिठाइयां, तैयार भोजन, पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर और शीतल पेय तक की मौके पर जांच की जा रही है, जहां भी गुणवत्ता पर संदेह मिला. वहां खाद्य पदार्थ तत्काल नष्ट कर दिए गए और संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी गई. अभी तक सैकड़ों खाद्य सामग्री मिलावट भरी मिली है.
मिलावट पर बड़ा प्रहार: कांवड़ मेले के दौरान 30 जुलाई से 3 अगस्त तक चले विशेष अभियान के आंकड़े बताते हैं कि विभाग ने जांच का दायरा लगातार बढ़ाया.
शुरुआती दो दिनों में ही 130 खाद्य नमूनों की मौके पर जांच हुई, जिनमें 13 नमूने अधोमानक (Substandard) पाए गए और तत्काल नष्ट कर दिए गए.
इसके बाद 1 अगस्त को 65 नमूनों की जांच में सात खाद्य पदार्थ मानकों पर खरे नहीं उतरे.
वहीं 2 अगस्त को 79 नमूनों की जांच हुई, जिनमें नौ अधोमानक (गलत ) मिले.
3 अगस्त को मोबाइल टेस्टिंग लैब ने 64 खाद्य नमूनों की जांच की जिनमें सात नमूने खराब गुणवत्ता के पाए गए.



