मृतक को मुआवजे को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सुशील गाबा सहित बजाज मोटर्स के कर्मचारियों का जोरदार प्रर्दशन, भारी हंगामा के बाद पूर्व विधायक ठुकराल हस्तक्षेप कर निपटाया मामला

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रूद्रपुर- रेलवे पटरी के समीप ट्रेन दुर्घटना का शिकार हुये बजाज मोटर्स के कर्मचारी सुरेश प्रसाद पुत्र बाजी लाल की दुखद मृत्यु तथा उसके बाद कंपनी प्रबंधन के गैर जिम्मेदारान अमानवीय व्यवहार से आहत बजाज मोटर्स के दर्जनों कामगार सामाजिक कार्यकर्ता सुशील गाबा के साथ प्रातः ही पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। प्रातः लगभग 10:30 बजे पोस्टमार्टम की कार्यवाही संपादित होनें के बाद मृतक सुरेश प्रसाद के पुत्र इंद्रजीत को परमानेंट नौकरी 20 लाख रुपए का मुआवजा की मांग को लेकर बजाज कंपनी के श्रमिकों ने सुरेश प्रसाद की पार्थिव देह को बजाज कंपनी में ले जाया गया और गेट के सामने ही धरना लगा दिया गया। गेट पर भारी संख्या में पुलिस बल एवं पीएसी की तैनाती के बाद भी गाबा और श्रमिक पक्ष के डटे रहने से माहौल बहुत तनावपूर्ण हो गए। इधर श्रमिकों के साथ सुशील गाबा डट गए और उधर प्रबंधन ने भी अड़ियल रवैया अपना लिया । भारी होते माहौल के बीच दोपहर 2:00 बजे लगभग पूर्व विधायक राजकुमार ठकराल मामले का स्वत संज्ञान लेते हुए बजाज मोटर पहुंचे। भारी पुलिस बल के बीच गाबा पक्ष और प्रबंधन के बीच जरी वाली तनाव को कम करते हुए वार्ता की पहल की, जिसके बाद पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, समाजसेवी सुशील गाबा, बजाज मोटर्स के कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष जगमोहन रसीला महामंत्री हीरालाल राठौर तथा प्रबंधन पक्ष की ओर से प्लांट हेड सुनील कुमार पीपल तथा एचआर हेड सुरेश गुप्ता की पुलिस बल की मौजूदगी में वार्ता हुई। देर तक चली वार्ता के बाद प्रबंधन ने मृतक के पुत्र इंद्रजीत को पक्की नौकरी देने, कंपनी पॉलिसी के अनुसार मुआवजा, सभी स्टाफ और कर्मियों के एक दिन के वेतन और एंबुलेंस तथा अंतिम संस्कार हेतु नगद धनराशि देना स्वीकार किया। समाजसेवी गाबा ने भी व्यक्तिगत रूप से 20000 की धनराशि का चेक मृतक के परिवार को सौंपा। इस तरह मामले को सुलझाया गया। इस दौरान समाजसेवी सुशील गाबा, सिडकुल श्रमिक मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी, बजाज मोटर्स कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष जगमोहन डसीला, महामंत्री हीरा लाल राठौर, कोषाध्यक्ष हेम दूर्गापाल, हैप्पी रंधावा, केरू मंडल, अशोक यादव, ललित बिष्ट, संतोष गुप्ता, उमाशंकर यादव, ललित मटियाली, शिवशंकर प्रसाद, रामजीत प्रसाद, प्रमोद कुमार, विजय लाल, कैलाश कुमार, वीरेन्द्र प्रसाद, अनिल तिवारी, गुड्डू कुमार, तारा सिंह रावत, अविनाश कुमार, जनक किशोर, गोपी गुप्ता, राम प्रवेश प्रजापति, सुदर्शन प्रसाद, नन्हें यादव, अनूप सिंह रावत, सतेन्द्र सिंह, कौशल कुमार आदि सहित सैकड़ों श्रमिक मौजूद थे।