
देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत के कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने की खबरों के बीच उन्होंने खुद सामने आकर स्थिति साफ कर दी है। हरीश रावत ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने मीडिया में चल रही खबरों को गलत बताते हुए अपने पूर्व बयान को पूरी तरह पढ़ने की अपील की है।
हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की सदस्यता उनके लिए सिर्फ राजनीतिक पहचान नहीं, बल्कि उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि कांग्रेस की सदस्यता उनके “खून और हड्डियों” में है और हरीश रावत आज जो कुछ भी हैं, उसमें कांग्रेस का बड़ा योगदान है।
दरअसल, देहरादून में ईडी की कार्रवाई को लेकर हरीश रावत ने अपनी चिंता जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि यदि इस पूरे मामले से कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के नैरेटिव पर कोई असर पड़ता है, तो वह पार्टी में अपने पदों से इस्तीफा देने पर विचार कर सकते हैं।
इसी बयान को लेकर मीडिया के कुछ हिस्सों में यह खबर प्रसारित होने लगी कि हरीश रावत ने कांग्रेस पार्टी से ही इस्तीफा दे दिया है। अब हरीश रावत ने इस खबर को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा है कि मीडिया उनके पोस्ट और ट्वीट को संपूर्णता में पढ़े और उसके बाद ही खबर प्रकाशित करे।
उन्होंने साफ किया कि बात कांग्रेस की सदस्यता छोड़ने की नहीं, बल्कि पार्टी में उनके पास मौजूद पदों से इस्तीफा देने की इच्छा जताने की थी। हरीश रावत के पास प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य और एआईसीसी वर्किंग कमेटी के सदस्य के रूप में जिम्मेदारियां हैं।
हरीश रावत के इस स्पष्टीकरण के बाद उनके कांग्रेस छोड़ने की चर्चाओं पर फिलहाल विराम लग गया है। हालांकि, ईडी की कार्रवाई और उसके राजनीतिक असर को लेकर उनके बयान ने उत्तराखंड की सियासत में नई बहस जरूर छेड़ दी है।



