
परिवहन विभाग निजी वाहनों से व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वालों पर कार्रवाई कर रहा है, डिलीवरी करने वालों ने अपनी परेशानी बताई
देहरादून: उत्तराखंड में निजी वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर परिवहन विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है. निजी वाहनों से किराये पर सवारियां ढोने के साथ-साथ खाना, किराना और अन्य सामान की डिलीवरी करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी. दरअसल, प्रदेश में लंबे समय से निजी वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने की कवायद चल रही थी. परिवहन विभाग के निर्देश के बाद देहरादून संभागीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) की बैठक में इसे सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया गया है.
निजी वाहनों से सवारी ढोने और डिलीवरी करने वाले पर होगी कार्रवाई: दरअसल, देहरादून में रैपिडो, स्विगी, जोमैटो समेत अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए निजी वाहनों का नियम विरुद्ध व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे वाहनों का उपयोग यात्रियों को ढोने या सामान की डिलीवरी के लिए किया जा रहा है. ऐसे में अब जांच के दौरान निजी वाहन से सवारी ढोते या व्यावसायिक पार्सल पहुंचाते पाए जाने पर वाहन चालक के खिलाफ चालान, वाहन सीज करने के साथ ही अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
निजी वाहनों से डिलीवरी नहीं हो सकेगी
परिवहन विभाग इसलिए कर रहा है कार्रवाई: परिवहन विभाग के अनुसार, निजी श्रेणी के वाहन व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए रजिस्टर्ड होते हैं. इनका इस्तेमाल किराये पर सवारी ढोने या व्यावसायिक डिलीवरी के लिए नहीं किया जा सकता. व्यावसायिक कामों के लिए परिवहन श्रेणी में पंजीकृत वाहन, वैध परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा और अन्य जरूरी दस्तावेज होना आवश्यक है. यही वजह है कि परिवहन विभाग ने अब सड़क सुरक्षा, यात्रियों की सुरक्षा और कर-परमिट व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने को लेकर कार्रवाई करने का निर्णय लिया है. यही नहीं, निजी वाहनों के व्यावसायिक संचालन से नियमों का उल्लंघन होने के साथ-साथ वैध परमिट वाले वाहन संचालकों को भी नुकसान पहुंचता है.
इन चार इलाकों में चलेगा चेकिंग अभियान: परिवहन विभाग ने निर्णय लिया है कि देहरादून के अलावा ऋषिकेश, विकासनगर, सहसपुर और अन्य क्षेत्रों में भी जांच अभियान चलाया जाएगा. साथ ही विभागीय टीमें सार्वजनिक स्थानों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशन और उन इलाकों पर विशेष नजर रखेंगी, जहां निजी वाहनों के जरिए सवारी या पार्सल बुकिंग की जाती है. इसमें साथ ही परिवहन विभाग ने वाहन मालिकों और ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म से जुड़े चालकों को नियमों का पालन करने की चेतावनी दी है.
बिना कमर्शियल में रजिस्ट्रेशन किए नहीं कर पाएंगे डिलीवरी: उप परिवहन आयुक्त शैलेश कुमार तिवारी ने कहा कि-
तमाम लोग ऐसे हैं, जो खाने पीने की चीजों के साथ ही अन्य चीजों के पार्सल की डिवीलरी कर रहे हैं. उससे संबंधित कंपनियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है. पहले चरण के तहत जिन निजी वाहनों के जरिए सवारियों को ढोने का काम करने वालों पर कार्रवाई कर रहे हैं. बाकी पार्सल को डिलीवरी करने वाले लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी, जिनको अभी नोटिस दी जा रही है. ऐसे में अगर वाहनों का व्यावसायिक इस्तेमाल करना है, तो उसको कमर्शियल वाहन की श्रेणी में रजिस्टर्ड करके इस्तेमाल करें, अन्यथा वाहनों को सीज किया जाएगा. गाड़ी सीज होने के बाद जल्दी छूटेगी भी नहीं.
-शैलेश कुमार तिवारी, उप परिवहन आयुक्त-
परिवहन विभाग ऐसे पकड़ रहा कमर्शियल बने निजी वाहन: शैलेश कुमार तिवारी ने साथ ही कहा कि प्राइवेट वाहनों से सवारियों को ढोना बहुत असुरक्षित है. क्योंकि ऐसे वाहनों का दुर्घटना होने पर इंश्योरेंस का क्लेम नहीं मिल पाता है. साथ ही क्राइम होने का भी डर रहता है, जिसके चलते बड़े स्तर पर कार्रवाई की जा रही है. अभी तक देहरादून में 100 से अधिक टू व्हीलर गाड़ियों को सीज किया गया है. इसके लिए विभागीय अधिकारी ऐप के जरिए वाहन बुक करते हैं, फिर उस वाहन को सीज करते हैं. क्योंकि इनको ऐसे पकड़ना आसान नहीं है. इसके साथ ही ऐप का संचालन करने वाली कंपनियों को नोटिस देते हुए उनके कार्यालय में छापा भी मारा गया है.
पार्सल डिलीवरी करने वालों का दर्द: पार्सल डिलीवरी करने वाले राजकुमार गुप्ता ने बताया कि-
हम परिवहन विभाग के इस निर्णय के खिलाफ हैं. क्योंकि सामान की डिलीवरी करके हम जितना कमाएंगे नहीं, उससे ज्यादा कमर्शियल वाहन के टैक्स के रूप में देना पड़ेगा. वर्तमान स्थिति यह है कि पहले जितनी कमाई हो रही थी, अब उतनी कमाई नहीं हो पा रही है. ऐसे में परिवार के खर्च भी हैं. अगर अपने वाहन को कमर्शियल करवा लेते हैं और फिर उसके जरिए बाहर जाते हैं, तो फिर वहां पर भी टैक्स देना पड़ेगा.
-राजकुमार गुप्ता, डिलीवरी बॉय-
वाहन स्वामी ने बताई अपनी परेशानी: मुजफ्फरनगर के रहने वाले मोहम्मद शादिक ने बताया कि-
अगर हम अपने वाहन को कमर्शियल वाहन के रूप में तब्दील करते हैं, तो उनके काफी अधिक फाइनेंशियल दबाव पड़ेगा. पहले से ही कमाई काफी कम हो गई है. इसके साथ ही अपनी गाड़ी से ही अपने घर आना-जाना भी करते हैं. ऐसे में अगर वाहन को कमर्शियल कर लेते हैं, तो फिर और दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा.
-मो शादिक, डिलीवरी बॉय-



