
रुद्रपुर। श्री रामलीला कमेटी के तत्वावधान में नगर की प्रमुख, प्राचीन एवं ऐतिहासिक बस स्टैंड वाली श्री रामलीला के दूसरे दिन रावणदृवेदवती संवाद, श्रवण कुमार की मातृ-पितृ भक्ति, दशरथ के बाण से श्रवण की मृत्यु, उनके माता-पिता के विलाप एवं श्राप तथा माता सीता और प्रभु श्रीराम के जन्म तक की लीलाओं का मंचन किया गया। इन प्रसंगों में भक्ति, करुणा और उल्लास के विविध भाव सामने आए।
आज लीला का शुभारंभ रूद्रपुर के समाजसेवी, जेपीएस कलर लैब के स्वामी जगदीश टंडन नें प्रभु श्रीरामचन्द्र जी के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्जवलन कर किया। श्री रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों एवं सदस्यों नें समाजसेवी जगदीश टंडन का माल्यार्पण कर स्वागत किया।
लीला की शुरुआत रावण वेदवती संवाद से हुई। भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए तपस्या कर रही वेदवती और अहंकार में डूबे रावण के बीच संवाद ने धर्म तथा अधर्म के अंतर को उजागर किया। रावण के अनुचित व्यवहार पर वेदवती ने उसके विनाश का कारण बनने का संकल्प लिया। इस प्रसंग ने दर्शकों के सामने नारी के सम्मान और तपस्या की शक्ति का संदेश रखा।
इसके बाद श्रवण कुमार की मातृ-पितृ भक्ति का मार्मिक मंचन हुआ। अपने दृष्टिहीन माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर तीर्थयात्रा कराने वाले श्रवण की सेवा और समर्पण ने आदर्श पुत्र का स्वरूप प्रस्तुत किया। माता-पिता की प्यास बुझाने के लिए जल लेने पहुँचे श्रवण को राजा दशरथ का शब्दभेदी बाण लग गया। जल भरने की आवाज को वन्य जीव की आहट समझकर चलाए गए बाण से दशरथ को अपनी भूल का पता चला तो वे अत्यंत व्यथित हुए।
घायल श्रवण ने अंतिम क्षणों में भी अपने माता-पिता की चिंता की और दशरथ से उन्हें पानी पिलाने का आग्रह किया। पुत्र की मृत्यु का समाचार सुनकर असहाय माता-पिता का विलाप लीला का अत्यंत करुण प्रसंग बना। उन्होंने दशरथ को श्राप दिया कि जिस प्रकार वे पुत्र वियोग में प्राण त्याग रहे हैं, उसी प्रकार उन्हें भी पुत्र वियोग में मृत्यु प्राप्त होगी। इसके बाद दोनों ने दम तोड़ दिया।
करुण प्रसंगों के उपरांत माता सीता के जन्म की लीला मंचित हुई। राजा जनक द्वारा हल चलाते समय धरती से बालिका प्राप्त होने और उसे पुत्री के रूप में अपनाने का दृश्य श्रद्धा का केंद्र रहा।
अंत में अयोध्या में प्रभु श्रीराम सहित चारों भाइयों के जन्म का मंगलमय प्रसंग प्रस्तुत किया गया। राजमहल में खुशियों और उत्सव के दृश्यों के साथ दूसरे दिन की लीला संपन्न हुई। संपूर्ण मंचन ने माता-पिता की सेवा, नारी सम्मान, कर्मों के परिणाम और प्रभु के अवतरण का संदेश दिया।
आज की लीला में भगवान गणेश के रूप में आशीष ग्रोवर आशू, रावण की भूमिका में रमन अरोरा, वेदवती की भूमिका में सुमित आनन्द, श्रवण कुमार- पुलकित बाम्बा, माता- नरेश छाबड़ा, पिता शांतनु – मनोज मुंजाल, दशरथ- पंकज सुखीजा, जनक अनिल तनेजा, वशिष्ठ- मनोज मुंजाल, कौशल्या-सुमित आन्नद, सुमित्रा आशमन अरोरा, कैकयी-नरेश छाबड़ा, सुमन्त-मोहक अरोरा, श्रृंगी ऋषि, जोकर पार्टी में रामकृष्ण कन्नौजिया, गोला ईदरीसी, गोगी नरूला, रजत अरोरा आदि थे।
इस दौरान श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष मनोज गाबा, महामंत्री महामंत्री सुशील गाबा, कोषाध्यक्ष सीए अमित गंभीर, समन्यवयक राजेश छाबड़ा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश शर्मा, विजय अरोरा, हरीश अरोरा, महावीर आजाद, सचिव अमित अरोरा बोबी, राकेश सुखीजा, डायरेक्टर सुभाष खंडेलवाल, संदीप धीर, मंच सचिव विजय जग्गा, विजय विरमानी, जगदीश टंडन, रघुवीर अरोरा,
श्री रामनाटक क्लब के अध्यक्ष विशाल भुड्डी, महामंत्री गौरव तनेजा, कोषाध्यक्ष सचिन, संरक्षक मोहन लाल भुड्डी, सरपरस्त हरीश सुखीजा, प्रेम खुराना, राम कृष्ण कन्नौजिया, संजीव आनन्द, गुरशरण बब्बर शरणी, निर्देशक (डायरेक्टर) आशीष ग्रोवर आशू, गौरव राज बेहड़, मनोज मुंजाल, अनिल तनेजा, सचिव राजकुमार कक्कड़ एवं रमन अरोरा तथा मंच व्यवस्थापक मनोज अरोरा, सुभाष तनेजा, पंकज सुखीजा, सचिन आनन्द, नरेश छाबड़ा, पुलकित बांबा, सौरभ राज बेहड़, बंटी बाम्बा, कृतिका बाम्बा, आशीष मिड्ढा, कपिश सुखीजा, शिवम जग्गा, आशू सुखीजा, राजन राठौर, सहित हजारो रामभक्त मौजूद थे। श्रीरामलीला रामभक्त सुशील गाबा एवं संदीप धीर ने किया।




