उत्तराखंड में UCC और मदरसों में बदलाव पर बढ़ा विवाद, AIMPLB ने जताया कड़ा विरोध

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देहरादून में समान नागरिक संहिता (UCC) और मदरसा शिक्षा में किए गए बदलावों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने प्रेस वार्ता कर इन फैसलों का कड़ा विरोध जताया है। बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम ने कहा कि ये कदम संविधान की मूल भावना के खिलाफ हैं और सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत एक बहुधर्मी और बहुसांस्कृतिक देश है, जहां हर समुदाय को अपने पर्सनल लॉ के तहत जीवन जीने का अधिकार है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं, जबकि UCC इस अधिकार पर सीधा प्रहार करता है। AIMPLB का कहना है कि बिना सहमति किसी समुदाय पर ऐसा कानून थोपना उचित नहीं है और इस मुद्दे पर व्यापक संवाद होना चाहिए।
मदरसा शिक्षा को लेकर भी बोर्ड ने सरकार के फैसले पर नाराजगी जताई है। उत्तराखंड सरकार ने 1 जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत प्रदेश के 452 मदरसों को विद्यालयी शिक्षा बोर्ड से संबद्ध होना होगा। AIMPLB का तर्क है कि मदरसे केवल धार्मिक शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि गरीब मुस्लिम बच्चों के लिए शिक्षा का महत्वपूर्ण साधन हैं। ऐसे में अचानक बदलाव से हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
वहीं सरकार का कहना है कि UCC लागू होने से विवाह, तलाक, गोद लेने और संपत्ति जैसे मामलों में सभी धर्मों के लिए एक समान कानून लागू होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और सामाजिक समानता को बढ़ावा मिलेगा। मदरसों में भी आधुनिक शिक्षा लागू कर बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने की बात कही जा रही है।
हालांकि, मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों का मानना है कि इससे धार्मिक पहचान और स्वायत्तता प्रभावित होगी। AIMPLB ने संकेत दिया है कि यदि सरकार ने संवाद नहीं किया तो वे कानूनी रास्ता अपनाते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट तक ले जा सकते हैं। फिलहाल यह मुद्दा उत्तराखंड में एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है।