
केंद्र सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल पेश किया. इसके बाद सदन में इस पर लंबी बहस हुई. लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आज अपना पक्ष रखा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अपनी राय रखी थी.
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया. सदन में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े.
महिला आरक्षण अधिनियम संशोधन विधेयक गिरा
महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ पारित नहीं हो पाया, पक्ष में 298 वोट और विरोध में 230 वोट पड़े. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा: संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के बाद अब इससे संबंधित दो विधेयकों ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ को आगे नहीं बढ़ा सकते.
लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है. सरकार ने इस विधेयक के साथ ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका.



