हाईटेक हुई हरिद्वार कांवड़ यात्रा, 10 ड्रोन से निगरानी, अब तक बचाये गये 37 कांवड़िये

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एडीजी लॉ एंड ऑर्डर ने कांवड़ यात्रा के कंट्रोल रूम पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. साथ ही उन्होंने जवानों को निर्देशित भी किया.
हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार में इन दिनों कांवड़ यात्रा चल रही है. डाक कांवड़ का आगमन शुरू होते ही पुलिस प्रशासन के सामने भीड़ और यातायात व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है. बड़ी संख्या में डाक कांवड़ वाहनों के हरिद्वार पहुंचने के बीच पुलिस ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है.
इसी को लेकर एडीजी लॉ एंड ऑर्डर वी मुरुगेशन ने शुक्रवार को हरिद्वार पहुंचकर कांवड़ मेला क्षेत्र का निरीक्षण किया. उन्होंने सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया.
एडीजी सबसे पहले सीसीआर भवन में बने कमांड कंट्रोल रूम पहुंचे. यहां उन्होंने मेला क्षेत्र में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भीड़ की स्थिति, प्रमुख मार्गों, चौराहों और संवेदनशील स्थानों की व्यवस्था को देखा. हरिद्वार के एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर और अन्य अधिकारियों से उन्होंने कंट्रोल रूम के माध्यम से की जा रही निगरानी, भीड़ नियंत्रण और यातायात संचालन के संबंध में जानकारी ली.
हरिद्वार में एडीजी लॉ एंड ऑर्डर
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी क्षेत्र में भीड़ का दबाव बढ़ने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं. इसके बाद एडीजी ने प्रमुख चौराहों, पार्किंग स्थलों और हाईवे का निरीक्षण किया. डाक कांवड़ वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उन्होंने यातायात व्यवस्था की समीक्षा की। पार्किंग स्थलों में वाहनों की स्थिति, हाईवे पर यातायात का दबाव और कांवड़ियों की आवाजाही के लिए बनाए गए मार्गों का भी जायजा लिया गया.
500 सीसीटीवी, 10 ड्रोन कैमरों से निगरानी: डाक कांवड़ के दौरान बड़ी संख्या में शिवभक्त कम समय में गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना होते हैं. इसलिए पूरे मेला क्षेत्र में 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के साथ ही 10 ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है. उसके साथ ही साइबर कमांडो भी तैनात किए गए हैं.
अब तक बचाये गये 37 कांवड़िये: कांवड़ मेले में शिवभक्तों की सुरक्षा को लेकर एसडीआरएफ की टीमें गंगा घाटों से लेकर पहाड़ी क्षेत्रों तक मुस्तैद हैं. गंगा घाटों पर संवेदनशील घाटों पर एसडीआरएफट के जवान लगातार निगरानी कर रहे हैं. मेले के दौरान भीड़ और आकस्मिक घटनाओं पर नजर रखने के लिए हाईटेक ड्रोन की भी मदद ली जा रही है. मेले की शुरुआत से अब तक रेस्क्यू अभियानों में गंगा के तेज बहाव में बह रहे 37 कांवड़ियों को सकुशल बचा चुकी है.एसडीआरएफ सेनानायक अर्पण यदुवंशी ने हरिद्वार पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियों का जायजा लिया. उनके नेतृत्व में हाईवे से गुजर रहे कांवड़ियों को एसडीआरएफ के जवानों ने फल और जल बांटे. साथ ही ड्रोन कैमरे की मदद से गंगा घाटों की स्थिति का जायजा लिया.
ड्रोन से पूरे मेला क्षेत्र पर नजर: आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से एसडीआरएफ को हाईटेक कमर्शियल ड्रोन उपलब्ध कराया गया है. यह व्हीकल माउंटेड ड्रोन है, जिसे एक वाहन के माध्यम से मौके पर ले जाकर संचालित किया जा सकता है. कंट्रोल रूम से ड्रोन के जरिये मेला क्षेत्र, गंगा घाटों पर भीड़ और संवेदनशील स्थानों की निगरानी की जा रही है. किसी भी आकस्मिक स्थिति में ड्रोन की मदद से तत्काल स्थिति का आकलन कर रेस्क्यू टीम को मौके पर भेजने में मदद मिल रही है.
हरिद्वार में बैरागी कैंप पार्किंग सबसे ज्यादा क्षमता वाली पार्किंग है. मेरठ, सहारनपुर, नोएडा, दिल्ली और हरियाणा से आने वाले डाक कांवड़ वाहनों को नगला इमारती बायपास से डायवर्ट कर पहले लक्सर और फिर हरिद्वार भेजा जा रहा है. जगजीतपुर डायवर्जन प्वाइंट से डाक कांवड़ वाहनों को बैरागी कैंप पार्किंग में भेजा जा रहा है. यही कारण है कि नगला इमारती बायपास पर वाहनों की लंबी लाइन लगी है.
क्या बोले अधिकारी: एडीजी वी. मुरुगेशन ने बताया पुलिस प्रशासन की ओर से कांवड़ मेले की सुरक्षा की पुख्ता तैयारी की है. ठोस यातायात प्लान बनाया गया है. उन्होंने कांवड़ियों से संयम और सावधानी के साथ यात्रा करने की अपील की. उन्होंने कहा कांवड़ यात्रा आस्था का पर्व है. सभी शिवभक्त यातायात नियमों का पालन करें. पुलिस प्रशासन की ओर से बनाए गए रूट और व्यवस्थाओं का पालन करते हुए सुरक्षित यात्रा करें.
पिछले वर्ष मेले के दौरान 95 रेस्क्यू अभियानों में 165 लोगों की जान बचाई गई थी. इस बार भी टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है. कांवड़ मेला क्षेत्र में अभी तक 37 लोगों को गंगा में डूबने से बचाया जा चुका है. मौसम विभाग की ओर से जारी ऑरेंज अलर्ट तथा गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए घाटों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है.
अर्पण यदुवंशी, एसडीआरएफ सेनानायक