देहरादून में डबल हेलमेट नियम को ठेंगा, पिलियन राइडर भर रहे फर्राटा, कैमरों से कट रहे चालान देहरादून में बिना हेलमेट दौड़ रहे पिलियन राइडर, जनवरी 2026 से लेकर अबतक 33,165 लोगों का चालान देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में दोपहिया वाहन पर पीछे बैठने वाले पिलियन राइडर (Pillion Rider) के लिए हेलमेट पहनना कानूनी रूप से अनिवार्य है, लेकिन इसके बावजूद शहर की सड़कों पर बड़ी संख्या में लोग बिना हेलमेट के सफर करते नजर आ रहे हैं. खास बात ये है कि इन लोगों को यह भी पता नहीं चलता कि उनका चालान ट्रैफिक पुलिस नहीं, बल्कि ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों के जरिए हो रहा है. देहरादून में पिलियन राइडर को हेलमेट पहनना है अनिवार्य: दरअसल, नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के बाद 10 अगस्त 2018 से उत्तराखंड में पिलियन राइडर यानी किसी दोपहिया वाहन बाइक, स्कूटी के मुख्य चालक के पीछे की सीट पर बैठने वाले सह-यात्री के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य किया गया था. शुरुआती दौर में पुलिस और परिवहन विभाग ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर नियम का पालन कराया, लेकिन समय के साथ इसकी सख्ती कम होती चली गई. बिना हेलमेट दौड़ रहे पिलियन राइडर पीछे बैठा व्यक्ति नहीं पहन रहा हेलमेट: अब स्थिति ये है कि दून शहर में रोजाना बड़ी संख्या में ऐसे दोपहिया वाहन दिखाई देते हैं, जिनमें चालक या पीछे बैठा व्यक्ति हेलमेट नहीं पहनता. शहर में तैनात सीपीयू (सिटी पेट्रोल यूनिट) चेकिंग भी करती है, लेकिन डबल हेलमेट दोपहिया वाहनों की चेकिंग कर उनका चालान तक कराना मुनासिब नहीं समझती है. यही वजह है कि पीछे बैठने वाला सह यात्री हेलमेट पहनता ही नहीं है. परिवहन विभाग की मानें तो, प्रदेशभर में ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए गए हैं. देहरादून जिले की बात करें तो आशारोड़ी, कटापत्थर, मोहकमपुर, भद्रकाली, तिमली के पास, ब्रह्मपुरी, कुठाल गेट, सत्य नारायण मंदिर और नेपाली फार्म समेत 8 प्रमुख स्थानों पर कैमरे लगे हैं. इन कैमरों के जरिए यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान कर ऑटोमेटिक ही ई-चालान जारी किए जाते हैं. “जनवरी 2026 से अब तक देहरादून में पिलियन राइडर के हेलमेट नहीं पहनने पर 33,165 चालान किए जा चुके हैं. इनमें ज्यादातर चालान एएनपीआर (ANPR) कैमरों के जरिए हुए हैं. जबकि, बाकी कार्रवाई प्रवर्तन टीमों ने मौके पर की है.”- संदीप सैनी, आरटीओ, देहरादून हेलमेट न पहनने से सिर पर लगती है गंभीर चोट: आरटीओ संदीप सैनी का कहना है कि हेलमेट नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और आगे भी सख्ती जारी रहेगी. सड़क हादसों में सिर पर गंभीर चोट मौत और गंभीर रूप से घायल होने का सबसे बड़ा कारण होती है. इसलिए चालक के साथ-साथ पीछे बैठने वाले व्यक्ति के लिए भी हेलमेट पहनना बेहद जरूरी है. हेलमेट का मकसद चालान नहीं, जान बचाना है: डबल हेलमेट पहनने नियम का मकसद सिर्फ चालान करना नहीं, बल्कि सड़क हादसों में लोगों की जान बचाना है. ऐसे में प्रशासन को नियमित रूप से प्रभावी प्रवर्तन जारी रखना होगा. जबकि, आम नागरिकों को भी अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए हर सफर में हेलमेट पहनने की आदत अपनानी होगी.

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देहरादून में बिना हेलमेट दौड़ रहे पिलियन राइडर, जनवरी 2026 से लेकर अबतक 33,165 लोगों का चालान
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में दोपहिया वाहन पर पीछे बैठने वाले पिलियन राइडर (Pillion Rider) के लिए हेलमेट पहनना कानूनी रूप से अनिवार्य है, लेकिन इसके बावजूद शहर की सड़कों पर बड़ी संख्या में लोग बिना हेलमेट के सफर करते नजर आ रहे हैं. खास बात ये है कि इन लोगों को यह भी पता नहीं चलता कि उनका चालान ट्रैफिक पुलिस नहीं, बल्कि ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों के जरिए हो रहा है.
देहरादून में पिलियन राइडर को हेलमेट पहनना है अनिवार्य: दरअसल, नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के बाद 10 अगस्त 2018 से उत्तराखंड में पिलियन राइडर यानी किसी दोपहिया वाहन बाइक, स्कूटी के मुख्य चालक के पीछे की सीट पर बैठने वाले सह-यात्री के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य किया गया था. शुरुआती दौर में पुलिस और परिवहन विभाग ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर नियम का पालन कराया, लेकिन समय के साथ इसकी सख्ती कम होती चली गई.
बिना हेलमेट दौड़ रहे पिलियन राइडर
पीछे बैठा व्यक्ति नहीं पहन रहा हेलमेट: अब स्थिति ये है कि दून शहर में रोजाना बड़ी संख्या में ऐसे दोपहिया वाहन दिखाई देते हैं, जिनमें चालक या पीछे बैठा व्यक्ति हेलमेट नहीं पहनता. शहर में तैनात सीपीयू (सिटी पेट्रोल यूनिट) चेकिंग भी करती है, लेकिन डबल हेलमेट दोपहिया वाहनों की चेकिंग कर उनका चालान तक कराना मुनासिब नहीं समझती है. यही वजह है कि पीछे बैठने वाला सह यात्री हेलमेट पहनता ही नहीं है.
परिवहन विभाग की मानें तो, प्रदेशभर में ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए गए हैं. देहरादून जिले की बात करें तो आशारोड़ी, कटापत्थर, मोहकमपुर, भद्रकाली, तिमली के पास, ब्रह्मपुरी, कुठाल गेट, सत्य नारायण मंदिर और नेपाली फार्म समेत 8 प्रमुख स्थानों पर कैमरे लगे हैं. इन कैमरों के जरिए यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान कर ऑटोमेटिक ही ई-चालान जारी किए जाते हैं.
“जनवरी 2026 से अब तक देहरादून में पिलियन राइडर के हेलमेट नहीं पहनने पर 33,165 चालान किए जा चुके हैं. इनमें ज्यादातर चालान एएनपीआर (ANPR) कैमरों के जरिए हुए हैं. जबकि, बाकी कार्रवाई प्रवर्तन टीमों ने मौके पर की है.”- संदीप सैनी, आरटीओ, देहरादून
हेलमेट न पहनने से सिर पर लगती है गंभीर चोट: आरटीओ संदीप सैनी का कहना है कि हेलमेट नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और आगे भी सख्ती जारी रहेगी. सड़क हादसों में सिर पर गंभीर चोट मौत और गंभीर रूप से घायल होने का सबसे बड़ा कारण होती है. इसलिए चालक के साथ-साथ पीछे बैठने वाले व्यक्ति के लिए भी हेलमेट पहनना बेहद जरूरी है.
हेलमेट का मकसद चालान नहीं, जान बचाना है: डबल हेलमेट पहनने नियम का मकसद सिर्फ चालान करना नहीं, बल्कि सड़क हादसों में लोगों की जान बचाना है. ऐसे में प्रशासन को नियमित रूप से प्रभावी प्रवर्तन जारी रखना होगा. जबकि, आम नागरिकों को भी अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए हर सफर में हेलमेट पहनने की आदत अपनानी होगी.