
राष्ट्रीय लोक अदालत में मुकदमों के निस्तारण का सबसे बड़ा लाभ यह है कि मामला हल होने पर जमा कोर्ट फीस वापस होती हैं.
नैनीताल: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के आदेशानुसार और उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आगामी 12 सितंबर को उत्तराखंड हाईकोर्ट सहित राज्य की सभी निचली अदालतों में ‘राष्ट्रीय लोक अदालत’ का आयोजन किया जा रहा है. इस लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य आपसी सुलह-समझौते और बातचीत के जरिए वर्षों से लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण कराना है. इसमें हाईकोर्ट में लंबित बैंक रिकवरी, सिविल वाद व अपील, मोटर दुर्घटना से संबंधित मामलों के साथ-साथ पति-पत्नी, भाई-भाई और भाई-बहन के बीच चल रहे पारिवारिक विवादों को आपसी सहमति से सुलझाया जाएगा.
फैसला अंतिम और बाध्यकारी, कोर्ट फीस भी होगी वापस: राष्ट्रीय लोक अदालत में मुकदमों के निस्तारण का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें मामला हल होने पर जमा की गई कोर्ट फीस वापस कर दी जाती है. लोक अदालत द्वारा सुनाया गया फैसला अंतिम व दोनों पक्षों पर बाध्यकारी होता है. इसके खिलाफ किसी भी अदालत में अपील, रिवीजन या रिव्यू का प्रावधान नहीं होता. इससे पक्षकारों का कीमती समय और कानूनी खर्च दोनों बचते हैं, जो भी पक्षकार अपने लंबित मामलों को सुलह के आधार पर समाप्त करना चाहते हैं, वे 12 सितंबर से पहले उत्तराखंड विधिक सेवा समिति के एडीआर भवन में संपर्क कर अपना मामला पंजीकृत करा सकते हैं.
बिना परमिशन के चल रही आरा मशीनों के मामले पर हुई सुनवाई: आज उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार सहित अन्य जगहों पर बिना परमिशन के चल रही आरा मशीनों के मामले को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की. मामले की सुनवाई के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ती मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने जनहित याचिका को निस्तारित करते हुई वन विभाग के मुखिया को निर्देश देते हुई कहा है कि उनके प्रत्यावेदन को नियमों के तहत निस्तारित करें. सुनवाई के दौरान आरा मशीन मालिकों का पक्ष भी सुना जाय.
मामले के अनुसार हरिद्वार निवासी समाजिक कार्यकर्ता मनु राठी ने जनहित याचिका दायर कर कहा कि सर्वोच्च न्यायलय ने सभी राज्यों को निर्देश देकर कहा था कि बिना सरकार की अनुमति के आरा मशीने संचालित नहीं होंगी. इसके लिए सरकार ने वर्ष 2024 में नियमावली भी बनाई, लेकिन वन विभाग के अधिकारीयों की मिलीभगत से हरिद्वार सहित कई अन्य जगहों पर बिना लाइसेंस के आरा मशीने चल रही है, जबकि नियमों के मुताबिक इनके संचालन के लिए लाइसेंस लेना आवश्यक है और तीन लाख की फीस जमा करनी आवश्यक है. अवैध रूप से चल रही मशीनों के द्वारा राज्य सरकार को राजस्व का नुकशान भी हो रहा है. जनहित याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की है कि अवैध रूप से चल रही आरा मशीनों को बंद करने के आदेश सरकार को दिया जाय.



