पूर्ण साक्षर राज्य बना उत्तराखंड, राज्यपाल ने दी स्वीकृति, जानिये कैसे हुआ कमाल

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साल 2023-24 में उत्तराखंड की साक्षरता दर 83.8 प्रतिशत थी. साल 2025 में यह बढ़कर 98.7 प्रतिशत तक पहुंची.
देहरादून: उत्तराखण्ड पूर्णतः साक्षर राज्य बन गया है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 तथा उल्लास (ULLAS) नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के मानकों को पूर्ण करने के दृष्टिगत राज्यपाल ने उत्तराखण्ड राज्य को पूर्णतः साक्षर राज्य घोषित करने की स्वीकृति दी है.
बता दें केंद्र सरकार के नव भारत साक्षरता कार्यक्रम उल्लास के दिशा-निर्देशों के अनुसार यदि किसी राज्य की साक्षरता दर 95 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाती है तो उसे पूर्ण साक्षर राज्य माना जा सकता है. उत्तराखंड में अभी साक्षरता दर 98.7 प्रतिशत है. इसी मानक के आधार पर उत्तराखंड पूर्णतः साक्षर हो गया है.
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने 25 मई को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के संशोधित मानकों के अनुरूप राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था. प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया कि किसी भी राज्य या देश में शत-प्रतिशत साक्षरता हासिल करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं माना जाता. वृद्धावस्था, गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं, मानसिक एवं बौद्धिक अक्षमताएं जैसे कई कारण ऐसे होते हैं जिनकी वजह से कुछ लोग साक्षरता अभियानों का हिस्सा नहीं बन पाते. इसी वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने 95 प्रतिशत साक्षरता दर को पूर्ण साक्षरता का मानक निर्धारित किया है.
उल्लास कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025 के लिए किए गए आंकलन के अनुसार सात वर्ष से कम आयु के बच्चों को छोड़कर उत्तराखंड की अनुमानित जनसंख्या एक करोड़ 23 लाख चार हजार 601 आंकी गई है. इनमें केवल एक लाख 31 हजार 986 लोग ऐसे हैं जो अभी भी निरक्षर श्रेणी में आते हैं. यह संख्या राज्य की कुल पात्र आबादी का मात्र 1.3 प्रतिशत है. इसका अर्थ है कि राज्य के 98 प्रतिशत से अधिक लोग पढ़ने-लिखने की क्षमता रखते हैं. यही आंकड़े उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किए जाने का प्रमुख आधार बने हैं.
बता दें साल 2023-24 में उत्तराखंड की साक्षरता दर 83.8 प्रतिशत थी. साल 2025 में यह बढ़कर 98.7 प्रतिशत तक पहुंची. इसके बाद उत्तराखंड उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है जिन्होंने कम समय में साक्षरता के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है.