
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के पहले दिन विपक्षी दलों ने हंगामा किया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्पादक बहस की अपील की. इसी बीच सरकार ने छात्र-युवा आंदोलन को शांत करने के लिए सीजेपी (Cockroach Janta Party) के प्रतिनिधियों से बातचीत शुरू की.
भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सीजेपी नेताओं से मुलाकात की और संसद में सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों की भी लंबी बैठक चली, जिसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल थे.
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत काफी हंगामेदार रहा. संसद के अंदर विपक्षी पार्टियों का हंगामा और बाहर सीजेपी का विरोध प्रदर्शन कुल मिलाकर दिल्ली का लुटियंस जोन सोमवार को सुरक्षा बलों से घिरे किले के रूप में तब्दील हो गया था जो दोपहर बाद भी आम नागरिकों के लिए सुलभ होना मुश्किल रहा.
हालांकि, संसद सत्र शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने सभी दलों से अपील की कि वे तथ्यों और तर्क पर आधारित चर्चा करें. उन्होंने कहा, “मजबूत तथ्य और तर्क अराजकता को कोई जगह नहीं देते.” पीएम ने हालिया उपलब्धियों का जिक्र करते हुए युवाओं की आकांक्षाओं पर फोकस करने को कहा.
इन उपलब्धियों में शामिल हैं- युवा स्टार्टअप का स्पेस माइलस्टोन, राजस्थान का नया ऑयल रिफाइनरी, तीसरा सेमीकंडक्टर प्लांट और दुनिया की सबसे लंबी ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन. मगर पीएम की अपील का कोई असर विपक्षी दलों पर नहीं दिखा और वे महंगाई, कृषि संकट और अन्य मुद्दों पर लगातार हंगामा करते रहे. बार बार स्पीकर के अनुरोध के बावजूद जब हंगामा नहीं थमा तो आखिरकार दोनों ही सदनों को कल तक के लिए स्थगित करना पड़ा.
सीजेपी के आंदोलन और विरोध को देखते हुए
सत्र के पहले दिन ही सरकार ने सीजेपी के साथ संवाद का रास्ता खोला. सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास और अशुतोष रंका ने केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा के आवास पर मुलाकात की. बैठक करीब 10 मिनट चली, जिसमें प्रतिनिधियों ने लिखित मेमोरेंडम सौंपा. सीजेपी की तीन मुख्य मांगों में…
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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा (नीट और अन्य परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोप में)
नीट अभ्यर्थियों की आत्महत्या करने वाले परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा.
नड्डा ने प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त कर सामान्य स्थिति बहाल करने की अपील की. उन्होंने कहा कि बातचीत का प्रस्ताव सीजेपी की ओर से आया था और वे भाजपा नेतृत्व से आंतरिक चर्चा करेंगे. सीजेपी ने संवाद के लिए तैयार रहने का संकेत दिया, लेकिन मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया अभी नहीं आई है.
वहीं संसद के बाहर ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान दिल्ली के संसद मार्ग पर भारी पुलिस बल तैनात रहा. अलग अलग विपक्षी पार्टियों ने भी मार्च या विरोध कर सीजेपी के साथ होने का दावा किया,बहरहाल कई छात्रों ने कहा कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा.
संसद का मानसून सत्र मध्य अगस्त तक चलेगा. विपक्षी हंगामे और छात्र आंदोलन के बीच सरकार संवाद और विकास पर जोर दे रही है. सरकार के सूत्र का कहना है कि यदि नीट की परीक्षा के रिजल्ट देखे जाएं तो टॉपर्स ज्यादातर पहली बार परीक्षा देने वाले छात्र हैं और इसमें काफी ज्यादा ऐसे परिवार से हैं जिनके सामने उनके अभिभावक के पास संसाधनों तक की कमी थी और सरकार ने परीक्षा लीक होने के बाद तुरंत जिम्मेदारी लेते हुए एक महीने के अंदर हीं छात्रों के भविष्य की चिंता करते हुए परीक्षा ली और रिजल्ट भी निकाला और जिनसे गलती हुई उनकी जिम्मेदारी भी तय की.
बहरहाल राम मंदिर दान मुद्दा हो या फिर नीट पेपर लीक जिस तरह से विपक्षी पार्टियां हंगामा कर रही हैं, उसे देखते हुए लगता है कि सत्र का पहला हफ्ता ऐसे ही हंगामे में धुलेगा.



