फर्जी कृषक बन खरीद ली कृषि भूमि,उत्तराखंड भू-कानून की अनदेखी पर प्रशासन की चुप्पी चिंताजनक : मनीश बावा

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रुद्रपुर : उत्तराखंड में कृषि भूमि खरीद से जुड़े एक गंभीर मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मनीश बावा ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि रुद्रपुर खेड़ा निवासी एक व्यक्ति ने कथित रूप से कूटरचित एवं भ्रामक दस्तावेजों के आधार पर स्वयं को वर्ष 2003 से पूर्व का कृषक दर्शाकर कृषि भूमि की खरीद की है।
मनीश बावा द्वारा जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, उधम सिंह नगर को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि संबंधित व्यक्ति ने फरवरी 2024 में ग्राम कोलड़ा स्थित कृषि भूमि का पंजीकृत बैनामा अपने पक्ष में कराया। शिकायत के अनुसार भूमि खरीद के समय स्वयं को वर्ष 2003 से पूर्व का कृषक बताते हुए कुछ अभिलेख प्रस्तुत किए गए, जबकि शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित अभिलेख वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते।
शिकायतकर्ता का कहना है कि इस संबंध में आवश्यक दस्तावेज एवं राजस्व अभिलेख उनके पास उपलब्ध हैं, जिनके आधार पर उन्होंने पूर्व में कोतवाली रुद्रपुर में भी शिकायत दर्ज कराई थी। साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर धोखाधड़ी, कूटरचना एवं अन्य प्रासंगिक धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है।
मनीश बावा का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति द्वारा नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं होगा, बल्कि उत्तराखंड के भू-कानूनों और कृषि भूमि संरक्षण की व्यवस्था को चुनौती देने जैसा होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अब तक जिला प्रशासन को कई शिकायतें दिए जाने के बावजूद मामले में कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब राज्य सरकार भ्रष्टाचार मुक्त शासन और भू-कानूनों के सख्त अनुपालन की बात करती है, तब उत्तराखंड भू-कानून के कथित उल्लंघन से जुड़े मामलों पर प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित सक्रियता क्यों नहीं दिखाई दे रही है।
उन्होंने मांग की कि मामले की गहन एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि राज्य की कृषि भूमि और भू-कानूनों की गरिमा बनी रहे तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।